श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.11.10

दशम स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

क्रीणीहि भोः फलानीति श्रुत्वा सत्वरमच्युतः।

फलार्थी धान्यमादाय ययौ सर्वफलप्रदः॥ १०

krīṇīhi bhoḥ phalānīti śrutvā satvaramacyutaḥ|

phalārthī dhānyamādāya yayau sarvaphalapradaḥ|| 10

अर्थ

एक दिन कोई फल बेचनेवाली आकर पुकार उठी—‘फल लो फल! यह सुनते ही समस्त कर्म और उपासनाओंके फल देनेवाले भगवान् अच्युत फल खरीदनेके लिये अपनी छोटी-सी अँजुलीमें अनाज लेकर दौड़ पड़े॥ १०॥

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