श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.11.9

दशम स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

दर्शयंस्तद्विदां लोक आत्मनो भृत्यवश्यताम्।

व्रजस्योवाह वै हर्षं भगवान् बालचेष्टितैः॥ ९

darśayaṃstadvidāṃ loka ātmano bhṛtyavaśyatām|

vrajasyovāha vai harṣaṃ bhagavān bālaceṣṭitaiḥ|| 9

अर्थ

इस प्रकार सर्वशक्तिमान् भगवान् अपनी बाल-लीलाओंसे व्रजवासियोंको आनन्दित करते और संसारमें जो लोग उनके रहस्यको जाननेवाले हैं, उनको यह दिखलाते कि मैं अपने सेवकोंके वशमें हूँ॥ ९॥✎ 1658

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1658 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: जानने-वाले → जाननेवाले

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