vrajasyovāha vai harṣaṃ bhagavān bālaceṣṭitaiḥ|| 9
अर्थ
इस प्रकार सर्वशक्तिमान् भगवान् अपनी बाल-लीलाओंसे व्रजवासियोंको आनन्दित करते और संसारमें जो लोग उनके रहस्यको जाननेवाले हैं, उनको यह दिखलाते कि मैं अपने सेवकोंके वशमें हूँ॥ ९॥✎ 1658
दर्शयंस्तद्विदां लोक आत्मनो भृत्यवश्यताम्।
व्रजस्योवाह वै हर्षं भगवान् बालचेष्टितैः॥ ९
इस प्रकार सर्वशक्तिमान् भगवान् अपनी बाल-लीलाओंसे व्रजवासियोंको आनन्दित करते और संसारमें जो लोग उनके रहस्यको जाननेवाले हैं, उनको यह दिखलाते कि मैं अपने सेवकोंके वशमें हूँ॥ ९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.11.9 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 197) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/11/9/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)