जब नन्दबाबा आदि बड़े-बूढ़े गोपोंने देखा कि महावनमें तो बड़े-बड़े उत्पात होने लगे हैं, तब वे लोग इकट्ठे होकर ‘अब व्रजवासियोंको क्या करना चाहिये’—इस विषयपर विचार करने लगे॥ २१॥
गोपवृद्धा महोत्पाताननुभूय बृहद्वने।
नन्दादयः समागम्य व्रजकार्यममन्त्रयन्॥ २१
जब नन्दबाबा आदि बड़े-बूढ़े गोपोंने देखा कि महावनमें तो बड़े-बड़े उत्पात होने लगे हैं, तब वे लोग इकट्ठे होकर ‘अब व्रजवासियोंको क्या करना चाहिये’—इस विषयपर विचार करने लगे॥ २१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.11.21 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 198) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/11/21/