श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.11.25

दशम स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

चक्रवातेन नीतोऽयं दैत्येन विपदं वियत्।

शिलायां पतितस्तत्र परित्रातः सुरेश्‍वरैः॥ २५

cakravātena nīto'yaṃ daityena vipadaṃ viyat|

śilāyāṃ patitastatra paritrātaḥ sureśvaraiḥ|| 25

अर्थ

बवंडररूपधारी दैत्यने तो इसे आकाशमें ले जाकर बड़ी भारी विपत्ति (मृत्युके मुख) में ही डाल दिया था, परन्तु वहाँसे जब वह चट्टानपर गिरा, तब भी हमारे कुलके देवेश्‍वरोंने ही इस बालककी रक्षा की॥ २५॥

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