श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.11.30

दशम स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

तच्छ्रुत्वैकधियो गोपाः साधु साध्विति वादिनः।

व्रजान् स्वान् स्वान् समायुज्य ययू रूढपरिच्छदाः॥ ३०

tacchrutvaikadhiyo gopāḥ sādhu sādhviti vādinaḥ|

vrajān svān svān samāyujya yayū rūḍhaparicchadāḥ|| 30

अर्थ

उपनन्दकी बात सुनकर सभी गोपोंने एक स्वरसे कहा—‘बहुत ठीक, बहुत ठीक।’ इस विषयमें किसीका भी मतभेद न था। सब लोगोंने अपनी झुंड-की-झुंड गायें इकट्ठी कीं और छकड़ोंपर घरकी सब सामग्री लादकर वृन्दावनकी यात्रा की॥ ३०॥

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