उन्होंने गौ और बछड़ोंको तो सबसे आगे कर लिया और उनके पीछे-पीछे सिंगी और तुरही जोर-जोरसे बजाते हुए चले। उनके साथ ही-साथ पुरोहितलोग भी चल रहे थे॥ ३२॥
गोधनानि पुरस्कृत्य शृंगाण्यापूर्य सर्वतः।
तूर्यघोषेण महता ययुः सहपुरोहिताः॥ ३२
उन्होंने गौ और बछड़ोंको तो सबसे आगे कर लिया और उनके पीछे-पीछे सिंगी और तुरही जोर-जोरसे बजाते हुए चले। उनके साथ ही-साथ पुरोहितलोग भी चल रहे थे॥ ३२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.11.32 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 199) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/11/32/