श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.11.37

दशम स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

एवं व्रजौकसां प्रीतिं यच्छन्तौ बालचेष्टितैः।

कलवाक्यैः स्वकालेन वत्सपालौ बभूवतुः॥ ३७

evaṃ vrajaukasāṃ prītiṃ yacchantau bālaceṣṭitaiḥ|

kalavākyaiḥ svakālena vatsapālau babhūvatuḥ|| 37

अर्थ

राम और श्याम दोनों ही अपनी तोतली बोली और अत्यन्त मधुर बालोचित लीलाओंसे गोकुलकी ही तरह वृन्दावनमें भी व्रजवासियोंको आनन्द देते रहे। थोड़े ही दिनोंमें समय आनेपर वे बछड़े चराने लगे॥ ३७॥

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