दूसरे ग्वालबालोंके साथ खेलनेके लिये बहुत-सी सामग्री लेकर वे घरसे निकल पड़ते और गोष्ठ (गायोंके रहनेके स्थान) के पास ही अपने बछड़ोंको चराते॥ ३८॥
अविदूरे व्रजभुवः सह गोपालदारकैः।
चारयामासतुर्वत्सान् नानाक्रीडापरिच्छदौ॥ ३८
दूसरे ग्वालबालोंके साथ खेलनेके लिये बहुत-सी सामग्री लेकर वे घरसे निकल पड़ते और गोष्ठ (गायोंके रहनेके स्थान) के पास ही अपने बछड़ोंको चराते॥ ३८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.11.38 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 200) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/11/38/