श्याम और राम कहीं बाँसुरी बजा रहे हैं, तो कहीं गुलेल या ढेलवाँससे ढेले या गोलियाँ फेंक रहे हैं। किसी समय अपने पैरोंके घुँघरूपर तान छेड़ रहे हैं तो कहीं बनावटी गाय और बैल बनकर खेल रहे हैं॥ ३९॥
क्वचिद् वादयतो वेणुं क्षेपणैः क्षिपतः क्वचित्।
क्वचित् पादैः किंकिणीभिः क्वचित् कृत्रिमगोवृषैः॥ ३९
श्याम और राम कहीं बाँसुरी बजा रहे हैं, तो कहीं गुलेल या ढेलवाँससे ढेले या गोलियाँ फेंक रहे हैं। किसी समय अपने पैरोंके घुँघरूपर तान छेड़ रहे हैं तो कहीं बनावटी गाय और बैल बनकर खेल रहे हैं॥ ३९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.11.39 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 200) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/11/39/