श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.12.41

दशम स्कन्ध · अध्याय 12 · अथ द्वादशोऽध्यायः

राजोवाच

ब्रह्मन् कालान्तरकृतं तत्कालीनं कथं भवेत्।

यत् कौमारे हरिकृतं जगुः पौगण्डकेऽर्भकाः॥ ४१

brahman kālāntarakṛtaṃ tatkālīnaṃ kathaṃ bhavet|

yat kaumāre harikṛtaṃ jaguḥ paugaṇḍake'rbhakāḥ|| 41

अर्थ

राजा परीक्षित‍्ने पूछा—भगवन्! आपने कहा था कि ग्वालबालोंने भगवान्‌की की हुई पाँचवें वर्षकी लीला व्रजमें छठे वर्षमें जाकर कही। अब इस विषयमें आप कृपा करके यह बतलाइये कि एक समयकी लीला दूसरे समयमें वर्तमानकालीन कैसे हो सकती है?॥ ४१॥

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