श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.13.17

दशम स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

क्वाप्यदृष्ट्वान्तर्विपिने वत्सान् पालांश्‍च विश्‍ववित्।

सर्वं विधिकृतं कृष्णः सहसावजगाम ह॥ १७

kvāpyadṛṣṭvāntarvipine vatsān pālāṃśca viśvavit|

sarvaṃ vidhikṛtaṃ kṛṣṇaḥ sahasāvajagāma ha|| 17

अर्थ

परन्तु जब ग्वालबाल और बछड़े उन्हें कहीं न मिले, तब वे तुरंत जान गये कि यह सब ब्रह्माकी करतूत है। वे तो सारे विश्‍वके एकमात्र ज्ञाता हैं॥ १७॥✎ 1419 2069

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #1419 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): छींके → छीके
  • #2069 यूनिकोड-रूप (अक्षर वही): डि़ → ड़ि

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