श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.15.29

दशम स्कन्ध · अध्याय 15 · अथ पञ्चदशोऽध्यायः

फलानां पततां शब्दं निशम्यासुररासभः।

अभ्यधावत् क्षितितलं सनगं परिकम्पयन्॥ २९

phalānāṃ patatāṃ śabdaṃ niśamyāsurarāsabhaḥ|

abhyadhāvat kṣititalaṃ sanagaṃ parikampayan|| 29

अर्थ

जब गधेके रूपमें रहनेवाले दैत्यने फलोंके गिरनेका शब्द सुना, तब वह पर्वतोंके साथ सारी पृथ्वीको कँपाता हुआ उनकी ओर दौड़ा॥ २९॥

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