वह बड़ा बलवान् था। उसने बड़े वेगसे बलरामजीके सामने आकर अपने पिछले पैरोंसे उनकी छातीमें दुलत्ती मारी और इसके बाद वह दुष्ट बड़े जोरसे रेंकता हुआ वहाँसे हट गया॥ ३०॥
समेत्य तरसा प्रत्यग् द्वाभ्यां पद्भ्यां बलं बली।
निहत्योरसि काशब्दं मुंचन् पर्यसरत् खलः॥ ३०
वह बड़ा बलवान् था। उसने बड़े वेगसे बलरामजीके सामने आकर अपने पिछले पैरोंसे उनकी छातीमें दुलत्ती मारी और इसके बाद वह दुष्ट बड़े जोरसे रेंकता हुआ वहाँसे हट गया॥ ३०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.15.30 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 235) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/15/30/