श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.15.36

दशम स्कन्ध · अध्याय 15 · अथ पञ्चदशोऽध्यायः

ततः कृष्णं च रामं च ज्ञातयो धेनुकस्य ये।

क्रोष्टारोऽभ्यद्रवन् सर्वे संरब्धा हतबान्धवाः॥ ३६

tataḥ kṛṣṇaṃ ca rāmaṃ ca jñātayo dhenukasya ye|

kroṣṭāro'bhyadravan sarve saṃrabdhā hatabāndhavāḥ|| 36

अर्थ

उस समय धेनुकासुरके भाई-बन्धु अपने भाईके मारे जानेसे क्रोधके मारे आगबबूला हो गये। सब-के-सब गधे बलरामजी और श्रीकृष्णपर बड़े वेगसे टूट पड़े॥ ३६॥

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