॥ श्रीहरिः ॥
ततः कृष्णं च रामं च ज्ञातयो धेनुकस्य ये।
क्रोष्टारोऽभ्यद्रवन् सर्वे संरब्धा हतबान्धवाः॥ ३६
tataḥ kṛṣṇaṃ ca rāmaṃ ca jñātayo dhenukasya ye|
kroṣṭāro'bhyadravan sarve saṃrabdhā hatabāndhavāḥ|| 36
अर्थ
उस समय धेनुकासुरके भाई-बन्धु अपने भाईके मारे जानेसे क्रोधके मारे आगबबूला हो गये। सब-के-सब गधे बलरामजी और श्रीकृष्णपर बड़े वेगसे टूट पड़े॥ ३६॥
ततः कृष्णं च रामं च ज्ञातयो धेनुकस्य ये।
क्रोष्टारोऽभ्यद्रवन् सर्वे संरब्धा हतबान्धवाः॥ ३६
उस समय धेनुकासुरके भाई-बन्धु अपने भाईके मारे जानेसे क्रोधके मारे आगबबूला हो गये। सब-के-सब गधे बलरामजी और श्रीकृष्णपर बड़े वेगसे टूट पड़े॥ ३६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.15.36 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 236) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/15/36/