॥ श्रीहरिः ॥
तांस्तानापततः कृष्णो रामश्च नृप लीलया।
गृहीतपश्चाच्चरणान् प्राहिणोत्तृणराजसु॥ ३७
tāṃstānāpatataḥ kṛṣṇo rāmaśca nṛpa līlayā|
gṛhītapaścāccaraṇān prāhiṇottṛṇarājasu|| 37
अर्थ
राजन्! उनमेंसे जो-जो पास आया, उसी-उसीको बलरामजी और श्रीकृष्णने खेल-खेलमें ही पिछले पैर पकड़कर तालवृक्षोंपर दे मारा॥ ३७॥
तांस्तानापततः कृष्णो रामश्च नृप लीलया।
गृहीतपश्चाच्चरणान् प्राहिणोत्तृणराजसु॥ ३७
राजन्! उनमेंसे जो-जो पास आया, उसी-उसीको बलरामजी और श्रीकृष्णने खेल-खेलमें ही पिछले पैर पकड़कर तालवृक्षोंपर दे मारा॥ ३७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.15.37 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 236) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/15/37/