श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.15.50

दशम स्कन्ध · अध्याय 15 · अथ पञ्चदशोऽध्यायः

वीक्ष्य तान् वै तथा भूतान् कृष्णो योगेश्‍वरेश्‍वरः।

ईक्षयामृतवर्षिण्या स्वनाथान् समजीवयत्॥ ५०

vīkṣya tān vai tathā bhūtān kṛṣṇo yogeśvareśvaraḥ|

īkṣayāmṛtavarṣiṇyā svanāthān samajīvayat|| 50

अर्थ

उन्हें ऐसी अवस्थामें देखकर योगेश्‍वरोंके भी ईश्‍वर भगवान् श्रीकृष्णने अपनी अमृत बरसानेवाली दृष्टिसे उन्हें जीवित कर दिया। उनके स्वामी और सर्वस्व तो एकमात्र श्रीकृष्ण ही थे॥ ५०॥✎ 2074

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #2074 यूनिकोड-रूप (अक्षर वही): डि़ → ड़ि

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