श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.17.1

दशम स्कन्ध · अध्याय 17 · अथ सप्तदशोऽध्यायः

अथ सप्तदशोऽध्यायः

कालियके कालियदहमें आनेकी कथा तथा भगवान्‌का
व्रजवासियोंको दावानलसे बचाना

राजोवाच

नागालयं रमणकं कस्मात्तत्याज कालियः।

कृतं किं वा सुपर्णस्य तेनैकेनासमंजसम्॥ १

nāgālayaṃ ramaṇakaṃ kasmāttatyāja kāliyaḥ|

kṛtaṃ kiṃ vā suparṇasya tenaikenāsamaṃjasam|| 1

अर्थ

राजा परीक्षित‍्ने पूछा—भगवन्! कालिय नागने नागोंके निवासस्थान रमणक द्वीपको क्यों छोड़ा था? और उस अकेलेने ही गरुडजीका कौन-सा अपराध किया था?॥ १॥

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें