परीक्षित्! यह सुनकर भगवान्के प्यारे पार्षद शक्तिशाली गरुडको बड़ा क्रोध आया। इसलिये उन्होंने कालिय नागको मार डालनेके विचारसे बड़े वेगसे उसपर आक्रमण किया॥ ५॥
तच्छ्रुत्वा कुपितो राजन् भगवान् भगवत्प्रियः।
विजिघांसुर्महावेगः कालियं समुपाद्रवत्॥ ५
परीक्षित्! यह सुनकर भगवान्के प्यारे पार्षद शक्तिशाली गरुडको बड़ा क्रोध आया। इसलिये उन्होंने कालिय नागको मार डालनेके विचारसे बड़े वेगसे उसपर आक्रमण किया॥ ५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.17.5 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 249) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/17/5/