तार्क्ष्यनन्दन गरुडजी विष्णुभगवान्के वाहन हैं और उनका वेग तथा पराक्रम भी अतुलनीय है। कालिय नागकी यह ढिठाई देखकर उनका क्रोध और भी बढ़ गया तथा उन्होंने उसे अपने शरीरसे झटककर फेंक दिया एवं अपने सुनहले बायें पंखसे कालिय नागपर बड़े जोरसे प्रहार किया॥ ७॥
तं तार्क्ष्यपुत्रः स निरस्य मन्युमान्
प्रचण्डवेगो मधुसूदनासनः।
पक्षेण सव्येन हिरण्यरोचिषा
जघान कद्रूसुतमुग्रविक्रमः॥ ७
तार्क्ष्यनन्दन गरुडजी विष्णुभगवान्के वाहन हैं और उनका वेग तथा पराक्रम भी अतुलनीय है। कालिय नागकी यह ढिठाई देखकर उनका क्रोध और भी बढ़ गया तथा उन्होंने उसे अपने शरीरसे झटककर फेंक दिया एवं अपने सुनहले बायें पंखसे कालिय नागपर बड़े जोरसे प्रहार किया॥ ७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.17.7 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 249) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/17/7/