॥ श्रीहरिः ॥
तत्र चक्रुः परिवृढौ गोपा रामजनार्दनौ।
कृष्णसंघट्टिनः केचिदासन् रामस्य चापरे॥ २०
tatra cakruḥ parivṛḍhau gopā rāmajanārdanau|
kṛṣṇasaṃghaṭṭinaḥ kecidāsan rāmasya cāpare|| 20
अर्थ
उस खेलमें ग्वालबालोंने बलराम और श्रीकृष्णको नायक बनाया। कुछ श्रीकृष्णके साथी बन गये और कुछ बलरामके॥ २०॥
तत्र चक्रुः परिवृढौ गोपा रामजनार्दनौ।
कृष्णसंघट्टिनः केचिदासन् रामस्य चापरे॥ २०
उस खेलमें ग्वालबालोंने बलराम और श्रीकृष्णको नायक बनाया। कुछ श्रीकृष्णके साथी बन गये और कुछ बलरामके॥ २०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.18.20 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 254) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/18/20/