श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.18.21

दशम स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

आचेरुर्विविधाः क्रीडा वाह्यवाहकलक्षणाः।

यत्रारोहन्ति जेतारो वहन्ति च पराजिताः॥ २१

ācerurvividhāḥ krīḍā vāhyavāhakalakṣaṇāḥ|

yatrārohanti jetāro vahanti ca parājitāḥ|| 21

अर्थ

फिर उन लोगोंने तरह-तरहसे ऐसे बहुत-से खेल खेले, जिनमें एक दलके लोग दूसरे दलके लोगोंको अपनी पीठपर चढ़ाकर एक निर्दिष्ट स्थानपर ले जाते थे। जीतनेवाला दल चढ़ता था और हारनेवाला दल ढोता था॥ २१॥

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