श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.18.3

दशम स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

स च वृन्दावनगुणैर्वसन्त इव लक्षितः।

यत्रास्ते भगवान् साक्षाद् रामेण सह केशवः॥ ३

sa ca vṛndāvanaguṇairvasanta iva lakṣitaḥ|

yatrāste bhagavān sākṣād rāmeṇa saha keśavaḥ|| 3

अर्थ

परन्तु वृन्दावनके स्वाभाविक गुणोंसे वहाँ वसन्तकी ही छटा छिटक रही थी। इसका कारण था, वृन्दावनमें परम मधुर भगवान् श्यामसुन्दर श्रीकृष्ण और बलरामजी निवास जो करते थे॥ ३॥

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