श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.19.13

दशम स्कन्ध · अध्याय 19 · अथैकोनविंशोऽध्यायः

ततश्‍च तेऽक्षीण्युन्मील्य पुनर्भाण्डीरमापिताः।

निशाम्य विस्मिता आसन्‍नात्मानं गाश्‍च मोचिताः॥ १३

tataśca te'kṣīṇyunmīlya punarbhāṇḍīramāpitāḥ|

niśāmya vismitā āsannātmānaṃ gāśca mocitāḥ|| 13

अर्थ

इसके बाद जब ग्वालबालोंने अपनी-अपनी आँखें खोलकर देखा तब अपनेको भाण्डीर वटके पास पाया। इस प्रकार अपने-आपको और गौओंको दावानलसे बचा देख वे ग्वालबाल बहुत ही विस्मित हुए॥ १३॥✎ 1932

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1932 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): दावा-नलसे → दावानलसे

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