इसके बाद जब ग्वालबालोंने अपनी-अपनी आँखें खोलकर देखा तब अपनेको भाण्डीर वटके पास पाया। इस प्रकार अपने-आपको और गौओंको दावानलसे बचा देख वे ग्वालबाल बहुत ही विस्मित हुए॥ १३॥✎ 1932
ततश्च तेऽक्षीण्युन्मील्य पुनर्भाण्डीरमापिताः।
निशाम्य विस्मिता आसन्नात्मानं गाश्च मोचिताः॥ १३
इसके बाद जब ग्वालबालोंने अपनी-अपनी आँखें खोलकर देखा तब अपनेको भाण्डीर वटके पास पाया। इस प्रकार अपने-आपको और गौओंको दावानलसे बचा देख वे ग्वालबाल बहुत ही विस्मित हुए॥ १३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.19.13 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 258) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/19/13/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#1932 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): दावा-नलसे → दावानलसे