श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.19.14

दशम स्कन्ध · अध्याय 19 · अथैकोनविंशोऽध्यायः

कृष्णस्य योगवीर्यं तद् योगमायानुभावितम्।

दावा‌ग्‍नेरात्मनः क्षेमं वीक्ष्य ते मेनिरेऽमरम्॥ १४

kṛṣṇasya yogavīryaṃ tad yogamāyānubhāvitam|

dāvāgnerātmanaḥ kṣemaṃ vīkṣya te menire'maram|| 14

अर्थ

श्रीकृष्णकी इस योगसिद्धि तथा योगमायाके प्रभावको एवं दावानलसे अपनी रक्षाको देखकर उन्होंने यही समझा कि श्रीकृष्ण कोई देवता हैं॥ १४॥✎ 1932

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1932 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): दावा-नलसे → दावानलसे

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें