परीक्षित्! सायंकाल होनेपर बलरामजीके साथ भगवान् श्रीकृष्णने गौएँ लौटायीं और वंशी बजाते हुए उनके पीछे-पीछे व्रजकी यात्रा की। उस समय ग्वालबाल उनकी स्तुति करते आ रहे थे॥ १५॥
गाः सन्निवर्त्य सायाह्ने सहरामो जनार्दनः।
वेणुं विरणयन् गोष्ठमगाद् गोपैरभिष्टुतः॥ १५
परीक्षित्! सायंकाल होनेपर बलरामजीके साथ भगवान् श्रीकृष्णने गौएँ लौटायीं और वंशी बजाते हुए उनके पीछे-पीछे व्रजकी यात्रा की। उस समय ग्वालबाल उनकी स्तुति करते आ रहे थे॥ १५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.19.15 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 258) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/19/15/