श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.2.11

दशम स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

नामधेयानि कुर्वन्ति स्थानानि च नरा भुवि।

दुर्गेति भद्रकालीति विजया वैष्णवीति च॥ ११

nāmadheyāni kurvanti sthānāni ca narā bhuvi|

durgeti bhadrakālīti vijayā vaiṣṇavīti ca|| 11

अर्थ

पृथ्वीमें लोग तुम्हारे लिये बहुत-से स्थान बनायेंगे और दुर्गा, भद्रकाली, विजया, वैष्णवी, कुमुदा, चण्डिका, कृष्णा, माधवी, कन्या, माया, नारायणी, ईशानी, शारदा और अम्बिका आदि बहुत-से नामोंसे पुकारेंगे॥ ११-१२॥

यह अर्थ श्लोक 11–12 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

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