श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.2.12

दशम स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

कुमुदा चण्डिका कृष्णा माधवी कन्यकेति च।

माया नारायणीशानी शारदेत्यम्बिकेति च॥ १२

kumudā caṇḍikā kṛṣṇā mādhavī kanyaketi ca|

māyā nārāyaṇīśānī śāradetyambiketi ca|| 12

अर्थ

पृथ्वीमें लोग तुम्हारे लिये बहुत-से स्थान बनायेंगे और दुर्गा, भद्रकाली, विजया, वैष्णवी, कुमुदा, चण्डिका, कृष्णा, माधवी, कन्या, माया, नारायणी, ईशानी, शारदा और अम्बिका आदि बहुत-से नामोंसे पुकारेंगे॥ ११-१२॥

यह अर्थ श्लोक 11–12 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

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