॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.2.14
सन्दिष्टैवं भगवता तथेत्योमिति तद्वचः।
प्रतिगृह्य परिक्रम्य गां गता तत् तथाकरोत्॥ १४
sandiṣṭaivaṃ bhagavatā tathetyomiti tadvacaḥ|
pratigṛhya parikramya gāṃ gatā tat tathākarot|| 14
अर्थ
जब भगवान्ने इस प्रकार आदेश दिया, तब योगमायाने ‘जो आज्ञा’—ऐसा कहकर उनकी बात शिरोधार्य की और उनकी परिक्रमा करके वे पृथ्वी-लोकमें चली आयीं तथा भगवान्ने जैसा कहा था, वैसे ही किया॥ १४॥