श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.2.16

दशम स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

भगवानपि विश्‍वात्मा भक्तानामभयंकरः।

आविवेशांशभागेन मन आनकदुन्दुभेः॥ १६

bhagavānapi viśvātmā bhaktānāmabhayaṃkaraḥ|

āviveśāṃśabhāgena mana ānakadundubheḥ|| 16

अर्थ

भगवान् भक्तोंको अभय करनेवाले हैं। वे सर्वत्र सब रूपमें हैं, उन्हें कहीं आना-जाना नहीं है। इसलिये वे वसुदेवजीके मनमें अपनी समस्त कलाओंके साथ प्रकट हो गये॥ १६॥

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