श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.2.6

दशम स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

भगवानपि विश्‍वात्मा विदित्वा कंसजं भयम्।

यदूनां निजनाथानां योगमायां१ समादिशत्॥ ६

bhagavānapi viśvātmā viditvā kaṃsajaṃ bhayam|

yadūnāṃ nijanāthānāṃ yogamāyāṃ samādiśat|| 6

अर्थ

विश्‍वात्मा भगवान्‌ने देखा कि मुझे ही अपना स्वामी और सर्वस्व माननेवाले यदुवंशी कंसके द्वारा बहुत ही सताये जा रहे हैं। तब उन्होंने अपनी योगमायाको यह आदेश दिया—॥ ६॥

टिप्पणियाँ

  1. १

    निद्रां।

    (मुद्रित पृष्ठ 129)

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