जब वर्षा होने लगती तब श्रीकृष्ण कभी किसी वृक्षकी गोदमें या खोड़रमें जा छिपते। कभी-कभी किसी गुफामें ही जा बैठते और कभी कन्द-मूल-फल खाकर ग्वालबालोंके साथ खेलते रहते॥ २८॥
क्वचिद् वनस्पतिक्रोडे गुहायां चाभिवर्षति।
निर्विश्य भगवान् रेमे कन्दमूलफलाशनः॥ २८
जब वर्षा होने लगती तब श्रीकृष्ण कभी किसी वृक्षकी गोदमें या खोड़रमें जा छिपते। कभी-कभी किसी गुफामें ही जा बैठते और कभी कन्द-मूल-फल खाकर ग्वालबालोंके साथ खेलते रहते॥ २८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.20.28 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 262) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/20/28/