कभी जलके पास ही किसी चट्टानपर बैठ जाते और बलरामजी तथा ग्वालबालोंके साथ मिलकर घरसे लाया हुआ दही-भात, दाल-शाक आदिके साथ खाते॥ २९॥
दध्योदनं समानीतं शिलायां सलिलान्तिके।
सम्भोजनीयैर्बुभुजे गोपैः संकर्षणान्वितः॥ २९
कभी जलके पास ही किसी चट्टानपर बैठ जाते और बलरामजी तथा ग्वालबालोंके साथ मिलकर घरसे लाया हुआ दही-भात, दाल-शाक आदिके साथ खाते॥ २९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.20.29 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 262) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/20/29/