परीक्षित्! जैसे पृथ्वीतलमें यदुवंशियोंके बीच यदुपति भगवान् श्रीकृष्णकी शोभा होती है, वैसे ही आकाशमें तारोंके बीच पूर्ण चन्द्रमा सुशोभित होने लगा॥ ४४॥✎ 2079
अखण्डमण्डलो व्योम्नि रराजोडुगणैः शशी।
यथा यदुपतिः कृष्णो वृष्णिचक्रावृतो भुवि॥ ४४
परीक्षित्! जैसे पृथ्वीतलमें यदुवंशियोंके बीच यदुपति भगवान् श्रीकृष्णकी शोभा होती है, वैसे ही आकाशमें तारोंके बीच पूर्ण चन्द्रमा सुशोभित होने लगा॥ ४४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.20.44 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 264) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/20/44/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)