श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.22.11

दशम स्कन्ध · अध्याय 22 · अथ द्वाविंशोऽध्यायः

न मयोदितपूर्वं वा अनृतं तदिमे विदुः।

एकैकशः प्रतीच्छध्वं सहैवोत सुमध्यमाः॥ ११

na mayoditapūrvaṃ vā anṛtaṃ tadime viduḥ|

ekaikaśaḥ pratīcchadhvaṃ sahaivota sumadhyamāḥ|| 11

अर्थ

ये मेरे सखा ग्वालबाल जानते हैं कि मैंने कभी कोई झूठी बात नहीं कही है। सुन्दरियो! तुम्हारी इच्छा हो तो अलग-अलग आकर अपने-अपने वस्त्र ले लो, या सब एक साथ ही आओ। मुझे इसमें कोई आपत्ति नहीं है’॥ ११॥✎ 1926

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1926 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): जल-क्रीडा → जलक्रीडा

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