श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.22.29

दशम स्कन्ध · अध्याय 22 · अथ द्वाविंशोऽध्यायः

अथ गोपैः परिवृतो भगवान् देवकीसुतः।

वृन्दावनाद् गतो दूरं चारयन् गाः सहाग्रजः॥ २९

atha gopaiḥ parivṛto bhagavān devakīsutaḥ|

vṛndāvanād gato dūraṃ cārayan gāḥ sahāgrajaḥ|| 29

अर्थ

प्रिय परीक्षित्! एक दिन भगवान् श्रीकृष्ण बलरामजी और ग्वालबालोंके साथ गौएँ चराते हुए वृन्दावनसे बहुत दूर निकल गये॥ २९॥

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