प्रिय परीक्षित्! एक दिन भगवान् श्रीकृष्ण बलरामजी और ग्वालबालोंके साथ गौएँ चराते हुए वृन्दावनसे बहुत दूर निकल गये॥ २९॥
अथ गोपैः परिवृतो भगवान् देवकीसुतः।
वृन्दावनाद् गतो दूरं चारयन् गाः सहाग्रजः॥ २९
प्रिय परीक्षित्! एक दिन भगवान् श्रीकृष्ण बलरामजी और ग्वालबालोंके साथ गौएँ चराते हुए वृन्दावनसे बहुत दूर निकल गये॥ २९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.22.29 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 280) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/22/29/