इस प्रकार उन कुमारियोंने, जिनका मन श्रीकृष्णपर निछावर हो चुका था, इस संकल्पके साथ एक महीनेतक भद्रकालीकी भलीभाँति पूजा कीं कि ‘नन्दनन्दन श्यामसुन्दर ही हमारे पति हों’॥ ५॥✎ 14261427
एवं मासं व्रतं चेरुः कुमार्यः कृष्णचेतसः।
भद्रकालीं समानर्चुर्भूयान्नन्दसुतः पतिः॥ ५
इस प्रकार उन कुमारियोंने, जिनका मन श्रीकृष्णपर निछावर हो चुका था, इस संकल्पके साथ एक महीनेतक भद्रकालीकी भलीभाँति पूजा कीं कि ‘नन्दनन्दन श्यामसुन्दर ही हमारे पति हों’॥ ५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.22.5 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 271) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/22/5/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)