श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.22.9

दशम स्कन्ध · अध्याय 22 · अथ द्वाविंशोऽध्यायः

तासां वासांस्युपादाय नीपमारुह्य सत्वरः।

हसद्भिः प्रहसन् बालैः परिहासमुवाच ह॥ ९

tāsāṃ vāsāṃsyupādāya nīpamāruhya satvaraḥ|

hasadbhiḥ prahasan bālaiḥ parihāsamuvāca ha|| 9

अर्थ

उन्होंने अकेले ही उन गोपियोंके सारे वस्त्र उठा लिये और बड़ी फुर्तीसे वे एक कदम्बके वृक्षपर चढ़ गये। साथी ग्वालबाल ठठा-ठठाकर हँसने लगे और स्वयं श्रीकृष्ण भी हँसते हुए गोपियोंसे हँसीकी बात कहने लगे—॥ ९॥✎ 1926

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1926 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): जल-क्रीडा → जलक्रीडा

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें