श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.22.8

दशम स्कन्ध · अध्याय 22 · अथ द्वाविंशोऽध्यायः

भगवांस्तदभिप्रेत्य कृष्णो योगेश्‍वरेश्‍वरः।

वयस्यैरावृतस्तत्र गतस्तत्कर्मसिद्धये॥ ८

bhagavāṃstadabhipretya kṛṣṇo yogeśvareśvaraḥ|

vayasyairāvṛtastatra gatastatkarmasiddhaye|| 8

अर्थ

परीक्षित्! भगवान् श्रीकृष्ण सनकादि योगियों और शंकर आदि योगेश्‍वरोंके भी ईश्‍वर हैं। उनसे गोपियोंकी अभिलाषा छिपी न रही। वे उनका अभिप्राय जानकर अपने सखा ग्वालबालोंके साथ उन कुमारियोंकी साधना सफल करनेके लिये यमुना-तटपर गये॥ ८॥✎ 1926

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1926 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): जल-क्रीडा → जलक्रीडा

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