एक दिन सब कुमारियोंने प्रतिदिनकी भाँति यमुनाजीके तटपर जाकर अपने-अपने वस्त्र उतार दिये और भगवान् श्रीकृष्णके गुणोंका गान करती हुई बड़े आनन्दसे जलक्रीडा करने लगीं॥ ७॥✎ 1926
नद्यां कदाचिदागत्य तीरे निक्षिप्य पूर्ववत्।
वासांसि कृष्णं गायन्त्यो विजह्रुः सलिले मुदा॥ ७
एक दिन सब कुमारियोंने प्रतिदिनकी भाँति यमुनाजीके तटपर जाकर अपने-अपने वस्त्र उतार दिये और भगवान् श्रीकृष्णके गुणोंका गान करती हुई बड़े आनन्दसे जलक्रीडा करने लगीं॥ ७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.22.7 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 271) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/22/7/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#1926 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): जल-क्रीडा → जलक्रीडा