श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.23.2

दशम स्कन्ध · अध्याय 23 · अथ त्रयोविंशोऽध्यायः

श्रीशुक उवाच

इति विज्ञापितो गोपैर्भगवान् देवकीसुतः।

भक्ताया विप्रभार्यायाः प्रसीदन्‍निदमब्रवीत्॥ २

iti vijñāpito gopairbhagavān devakīsutaḥ|

bhaktāyā viprabhāryāyāḥ prasīdannidamabravīt|| 2

अर्थ

श्रीशुकदेवजीने कहा—परीक्षित्! जब ग्वालबालोंने देवकीनन्दन भगवान् श्रीकृष्णसे इस प्रकार प्रार्थना की तब उन्होंने मथुराकी अपनी भक्त ब्राह्मणपत्‍नियोंपर अनुग्रह करनेके लिये यह बात कही—॥ २॥

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