श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.23.1

दशम स्कन्ध · अध्याय 23 · अथ त्रयोविंशोऽध्यायः

अथ त्रयोविंशोऽध्यायः

यज्ञपत्‍नियोंपर कृपा

गोपा ऊचुः

राम राम महावीर्य कृष्ण दुष्टनिवर्हण।

एषा वै बाधते क्षुन्‍नस्तच्छान्तिं कर्तुमर्हथः॥ १

rāma rāma mahāvīrya kṛṣṇa duṣṭanivarhaṇa|

eṣā vai bādhate kṣunnastacchāntiṃ kartumarhathaḥ|| 1

अर्थ

ग्वालबालोंने कहा—नयनाभिराम बलराम! तुम बड़े पराक्रमी हो। हमारे चित्तचोर श्यामसुन्दर! तुमने बड़े-बड़े दुष्टोंका संहार किया है। उन्हीं दुष्टोंके समान यह भूख भी हमें सता रही है। अतः तुम दोनों इसे भी बुझानेका कोई उपाय करो॥ १॥

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