परीक्षित्! इधर जब ब्राह्मणोंको यह मालूम हुआ कि श्रीकृष्ण तो स्वयं भगवान् हैं, तब उन्हें बड़ा पछतावा हुआ। वे सोचने लगे कि जगदीश्वर भगवान् श्रीकृष्ण और बलरामकी आज्ञाका उल्लंघन करके हमने बड़ा भारी अपराध किया है। वे तो मनुष्यकी-सी लीला करते हुए भी परमेश्वर ही हैं॥ ३७॥
अथानुस्मृत्य विप्रास्ते अन्वतप्यन् कृतागसः।
यद् विश्वेश्वरयोर्याच्ञामहन्म नृविडम्बयोः॥ ३७
परीक्षित्! इधर जब ब्राह्मणोंको यह मालूम हुआ कि श्रीकृष्ण तो स्वयं भगवान् हैं, तब उन्हें बड़ा पछतावा हुआ। वे सोचने लगे कि जगदीश्वर भगवान् श्रीकृष्ण और बलरामकी आज्ञाका उल्लंघन करके हमने बड़ा भारी अपराध किया है। वे तो मनुष्यकी-सी लीला करते हुए भी परमेश्वर ही हैं॥ ३७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.23.37 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 286) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/23/37/