जब उन्होंने देखा कि हमारी पत्नियोंके हृदयमें तो भगवान्का अलौकिक प्रेम है और हमलोग उससे बिलकुल रीते हैं, तब वे पछता-पछताकर अपनी निन्दा करने लगे॥ ३८॥
दृष्ट्वा स्त्रीणां भगवति कृष्णे भक्तिमलौकिकीम्।
आत्मानं च तया हीनमनुतप्ता व्यगर्हयन्॥ ३८
जब उन्होंने देखा कि हमारी पत्नियोंके हृदयमें तो भगवान्का अलौकिक प्रेम है और हमलोग उससे बिलकुल रीते हैं, तब वे पछता-पछताकर अपनी निन्दा करने लगे॥ ३८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.23.38 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 286) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/23/38/