श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.23.5

दशम स्कन्ध · अध्याय 23 · अथ त्रयोविंशोऽध्यायः

इत्यादिष्टा भगवता गत्वायाचन्त ते तथा।

कृतांजलिपुटा विप्रान् दण्डवत् पतिता भुवि॥ ५

ityādiṣṭā bhagavatā gatvāyācanta te tathā|

kṛtāṃjalipuṭā viprān daṇḍavat patitā bhuvi|| 5

अर्थ

जब भगवान्‌ने ऐसी आज्ञा दी, तब ग्वालबाल उन ब्राह्मणोंकी यज्ञशालामें गये और उनसे भगवान्‌की आज्ञाके अनुसार ही अन्‍न माँगा। पहले उन्होंने पृथ्वीपर गिरकर दण्डवत् प्रणाम किया और फिर हाथ जोड़कर कहा—॥ ५॥

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