श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.24.12

दशम स्कन्ध · अध्याय 24 · अथ चतुर्विंशोऽध्यायः

श्रीशुक २ उवाच

वचो निशम्य नन्दस्य तथान्येषां व्रजौकसाम्।

इन्द्राय मन्युं जनयन् पितरं प्राह केशवः॥ १२

vaco niśamya nandasya tathānyeṣāṃ vrajaukasām|

indrāya manyuṃ janayan pitaraṃ prāha keśavaḥ|| 12

अर्थ

श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! ब्रह्मा, शंकर आदिके भी शासन करनेवाले केशव भगवान्‌ने नन्दबाबा और दूसरे व्रजवासियोंकी बात सुनकर इन्द्रको क्रोध दिलानेके लिये अपने पिता नन्दबाबासे कहा॥ १२॥

टिप्पणियाँ

  1. २

    बादरायणिरुवाच।

     

    (मुद्रित पृष्ठ 290)

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