श्रीभगवान्ने कहा—पिताजी! प्राणी अपने कर्मके अनुसार ही पैदा होता और कर्मसे ही मर जाता है। उसे उसके कर्मके अनुसार ही सुख-दुःख, भय और मंगलके निमित्तोंकी प्राप्ति होती है॥ १३॥
कर्मणा जायते जन्तुः कर्मणैव विलीयते।
सुखं दुःखं भयं क्षेमं कर्मणैवाभिपद्यते॥ १३
श्रीभगवान्ने कहा—पिताजी! प्राणी अपने कर्मके अनुसार ही पैदा होता और कर्मसे ही मर जाता है। उसे उसके कर्मके अनुसार ही सुख-दुःख, भय और मंगलके निमित्तोंकी प्राप्ति होती है॥ १३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.24.13 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 290) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/24/13/