श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.24.14

दशम स्कन्ध · अध्याय 24 · अथ चतुर्विंशोऽध्यायः

अस्ति चेदीश्‍वरः कश्‍चित् फलरूप्यन्यकर्मणाम्।

कर्तारं भजते सोऽपि न ह्यकर्तुः प्रभुर्हि सः॥ १४

asti cedīśvaraḥ kaścit phalarūpyanyakarmaṇām|

kartāraṃ bhajate so'pi na hyakartuḥ prabhurhi saḥ|| 14

अर्थ

यदि कर्मोंको ही सब कुछ न मानकर उनसे भिन्‍न जीवोंके कर्मका फल देनेवाला ईश्‍वर माना भी जाय तो वह कर्म करनेवालोंको ही उनके कर्मके अनुसार फल दे सकता है। कर्म न करने-वालोंपर उसकी प्रभुता नहीं चल सकती॥ १४॥

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