श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.24.27

दशम स्कन्ध · अध्याय 24 · अथ चतुर्विंशोऽध्यायः

हूयन्ताम‌ग्‍नयः सम्यग् ब्राह्मणैर्ब्रह्मवादिभिः।

अन्‍नं बहुविधं तेभ्यो देयं वो धेनुदक्षिणाः॥ २७

hūyantāmagnayaḥ samyag brāhmaṇairbrahmavādibhiḥ|

annaṃ bahuvidhaṃ tebhyo deyaṃ vo dhenudakṣiṇāḥ|| 27

अर्थ

वेदवादी ब्राह्मणोंके द्वारा भलीभाँति हवन करवाया जाय तथा उन्हें अनेकों प्रकारके अन्‍न, गौएँ और दक्षिणाएँ दी जायँ॥ २७॥✎ 1667

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1667 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: आप-लोगोंको → आपलोगोंको

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