अनेकों प्रकारके पकवान—खीर, हलवा, पूआ, पूरी आदिसे लेकर मूँगकी दालतक बनाये जायँ। व्रजका सारा दूध एकत्र कर लिया जाय॥ २६॥✎ 1667
पच्यन्तां विविधाः पाकाः सूपान्ताः पायसादयः।
संयावापूपशष्कुल्यः सर्वदोहश्च गृह्यताम्॥ २६
अनेकों प्रकारके पकवान—खीर, हलवा, पूआ, पूरी आदिसे लेकर मूँगकी दालतक बनाये जायँ। व्रजका सारा दूध एकत्र कर लिया जाय॥ २६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.24.26 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 292) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/24/26/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)