श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.24.29

दशम स्कन्ध · अध्याय 24 · अथ चतुर्विंशोऽध्यायः

स्वलंकृता भुक्तवन्तः स्वनुलिप्ताः सुवाससः।

प्रदक्षिणं च कुरुत गोविप्रानलपर्वतान्॥ २९

svalaṃkṛtā bhuktavantaḥ svanuliptāḥ suvāsasaḥ|

pradakṣiṇaṃ ca kuruta goviprānalaparvatān|| 29

अर्थ

इसके बाद खूब प्रसाद खा-पीकर, सुन्दर-सुन्दर वस्त्र पहनकर गहनोंसे सज-सजा लिया जाय और चन्दन लगाकर गौ, ब्राह्मण, अग्‍नि तथा गिरिराज गोवर्धनकी प्रदक्षिणा की जाय॥ २९॥✎ 1667

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1667 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: आप-लोगोंको → आपलोगोंको

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